श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.4.23 
ब्रह्माण्ड-शत-भूत्य्-आढ्य-
सद्-यानारूढम् अद्भुतैः
गीतादिभिर् मुदाविष्टं
कान्ताद्यैः सदृशं प्रभोः
 
 
अनुवाद
वे सैकड़ों ब्रह्माण्डों के ऐश्वर्य से युक्त दिव्य वाहन पर सवार थे। संगीत और अन्य मनोरंजन उन्हें आनंद से भर देते थे। वे तेज और सौंदर्य में परम प्रभु के समान थे।
 
He rode a transcendental vehicle, endowed with the opulence of hundreds of universes. Music and other entertainments filled him with joy. He was equal to the Supreme Lord in brilliance and beauty.
तात्पर्य
वाइकुण्ठ विमान में प्रवेश करते हुए जिस व्यक्ति को गोपा-कुमार ने देखा, वह परमानंद में लीन था। वह अपने सेवकों से घिरा हुआ था जो उसे सर्वोच्च भगवान की तरह मानते थे और उसके पास सैंकड़ों भौतिक ब्रह्मांडों से अधिक धन-संपत्ति थी। वह भगवान के समान ही कपड़े और गहने पहने हुए था और उसके साथी उसका गुणगान कर रहे थे जैसे वह स्वयं भगवान हों।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)