यद्यपि ये सभी भक्त शाश्वत होने के कारण परमेश्वर के समान हैं, फिर भी सेवक और सेवित के बीच एक स्वाभाविक भेद है। यह भेद शाश्वत और वास्तविक है।
Although all these devotees are eternally equal to God, there is an inherent distinction between the servant and the served. This distinction is eternal and real.
तात्पर्य
साधना-सिद्ध भक्त, जो भौतिक जगत से मुक्ति के पश्चात वैकुण्ठ को प्राप्त कर चुके हैं, वे निःसंदेह सर्वोच्च अचूक भगवान से श्रेष्ठ नहीं हैं। कोई भी इस तथ्य पर संदेह नहीं कर सकता कि वे उनके अधीनस्थ हैं। किंतु क्यों भगवान के शाश्वत सहयोगी जैसे श्री शेष और गरुड़ को अधीनस्थ माना जाए? इस संदेह को दूर करने के लिए, हमें यह समझना होगा कि जिस प्रकार प्रभु और जीवों की समानता शाश्वत है, उसी प्रकार उनके अंतर भी शाश्वत हैं। सर्वोच्च प्रभु सदैव सेवा किए जाने वाले हैं, और जीव, चाहे वे कोई भी हों, हमेशा उनके सेवक हैं। यह एक मूलभूत तथ्य है, और कोई भी तार्किक चाल कभी भी इसका खंडन नहीं कर पाएगी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥