श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 178
 
 
श्लोक  2.4.178 
सा परापरयोः शक्त्योः
परा शक्तिर् निगद्यते
प्रभोः स्वाभाविकी सा हि
ख्याता प्रकृतिर् इत्य् अपि
 
 
अनुवाद
भगवान की शक्ति के दो भागों - पराशक्ति और अपराशक्ति - में से उसे पराशक्ति कहा गया है। वह स्वयं कार्य करती है और उसे प्रकृति भी कहा गया है।
 
Of the two divisions of the Lord's energy—the Parashakti and the Aparashakti—the Parashakti is called the Parashakti. She acts on her own and is also called Prakriti.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas