श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 176
 
 
श्लोक  2.4.176 
तथैव लक्ष्म्या भक्तानां
भक्तेर् लोकस्य कर्मणाम्
सा सा विशेष-वैचित्री
सदा सम्पद्यते यतः
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान के भक्तों, उनकी भक्ति, उनके संसार तथा उनके कार्यों की विभिन्न किस्में निरंतर लक्ष्मी से उत्पन्न होती हैं।
 
Thus the various varieties of the Lord's devotees, their devotion, their world and their activities are constantly emanating from Lakshmi.
तात्पर्य
प्रभु के कई भक्त हैं, जैसे श्री शेष और गरुड़। उनकी भक्तिमय सेवा के कई रूप हैं, जैसे सुनना और जपना। उनका निवास, श्री वैकुण्ठ में बहुत सारी समृद्धि हैं। और वे कई अलग-अलग क्रियाकलापों में व्यस्त रहते हैं। लक्ष्मी प्रभु की ऊर्जा हैं जिनके माध्यम से यह सारी विविधता प्रकट होती है। उनकी भागीदारी के बिना, प्रभु की अन्य ऊर्जाओं को विविधता में प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वे मूल रूप से शुद्ध आत्मा के रूप में उनके साथ एक हैं।

जैसे कि इस श्लोक में सदा शब्द इंगित करता है, पारलौकिक विविधता का प्रकटीकरण शाश्वत है और हमेशा विस्तारित होता जा रहा है। श्री विष्णु-संहिता के शब्दों में:

इच्छा-शक्तिर् ज्ञान-शक्तिर

क्रिया-शक्तिर इति त्रिधा

शक्ति-शक्तिमतोश् चा पि

ना भेदाः कश्चिद् इष्यते

"वह तीन ऊर्जाओं में विस्तारित होती है - इच्छा की ऊर्जा, ज्ञान की ऊर्जा और क्रिया की ऊर्जा। ऊर्जा और उसके स्वामी के बीच कभी भी कोई अंतर नहीं पाया जा सकता है।"

दूसरे अध्याय के अंत में, पूर्ण सत्य के भीतर विविधता की प्रकृति पर पहले ही विस्तार से चर्चा की जा चुकी है। संक्षेप में, भगवान नारायण के पास कद्रू के पुत्र शेष और विनता के पुत्र गरुड़ जैसे विभिन्न सहयोगी हैं। श्री नारायण का वैकुंठ भौतिक जगत में श्वेतदीप और रामाप्रिया-लोक जैसे विभिन्न रूपों में प्रकट होता है। उनकी भक्तिमय सेवा के विभिन्न अंगों (अंगों) में सुनने और जपने से शुरू होकर विभिन्न रुचियाँ दिखाई देती हैं। अपने विविध लीलाओं में वे अपने भक्तों के प्रति अपनी करुणामयी चिंता जैसे कई अद्भुत गुणों का प्रदर्शन करते हैं। और अपने सर्वोच्च निवास में वे अपनी माँ के स्तन का दूध पीने, जमीन पर रेंगने और बच्चों के खेल खेलने जैसे विभिन्न तरीकों से स्वयं का आनंद लेते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)