श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 172
 
 
श्लोक  2.4.172 
एवं धरण्य् अपि ज्ञेया
पराश् च भगवत्-प्रियाः
तथैव भगवच्-छक्तिर्
अपि सा ज्ञायतां त्वया
 
 
अनुवाद
तुम्हें यह समझना चाहिए कि मूल लक्ष्मी के समान ही पृथ्वी की देवी तथा भगवान की अन्य पत्नियाँ भी हैं, क्योंकि भगवान की सृजनात्मक शक्तियाँ सभी एक ही श्रेणी की हैं।
 
You should understand that like the original Lakshmi, there are also the goddesses of the earth and the other wives of the Lord, because the creative powers of the Lord are all of the same category.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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