इस लक्ष्मी के विपरीत, मूल महालक्ष्मी, भगवान नारायण की सबसे प्रिय सेवक है। हमेशा उनकी सेवा के लिए समर्पित, वह हमेशा उनकी छाती पर रहती है और कभी अच्छल नहीं होती। भगवान के भक्त हमेशा उस पूज्य भाव से पूजा करते हैं; वे कभी भी उसकी उपेक्षा नहीं करते जैसे कि वे उसके भौतिक विस्तार का करते हैं।
