श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  2.4.170 
या महा-सिद्धिवत् तासु
सर्व-सम्पद्-अधीश्वरी
मुमुक्षु-मुक्त-भक्तानाम्
उपेक्ष्या सैव भूति-दा
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी के उन अंशों में समस्त भौतिक ऐश्वर्य की नियंत्रक देवी हैं, जिनके अधीन महान सिद्धियाँ हैं। किन्तु उस ऐश्वर्य प्रदाता की मुक्तात्माओं, मोक्ष के अभ्यर्थियों और भगवान के भक्तों द्वारा घोर उपेक्षा की जाती है।
 
Among those aspects of Lakshmi is the goddess who controls all material opulence, possessing great powers. Yet, the bestower of that opulence is grossly neglected by liberated souls, aspirants for salvation, and devotees of the Lord.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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