शक्नोमि च न तान् प्रष्टुम्
अमुं गौरव-लज्जया
अभिप्रेयाय सर्व-ज्ञ-
वरो भागवतोत्तमः
अनुवाद
आदर और लज्जा के कारण मैं उनसे इन विषयों के बारे में पूछ नहीं सका, परन्तु सर्वज्ञ मनीषियों में श्रेष्ठ, महान वैष्णव, जानते थे कि मैं क्या सोच रहा था।
Out of respect and embarrassment, I could not ask him about these matters, but the greatest of all-knowing sages, the great Vaishnava, knew what I was thinking.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥