मया सम्पृच्छ्यमानं तद्-
वृत्तं वर-रहस्य-वत्
सङ्गोपयन् न कश्चिन् मे
समुद्घाटयति स्फुटम्
अनुवाद
जब मैं पूछता कि प्रभु इन यात्राओं पर क्या कर रहे हैं, तो हर कोई मुझसे सारी बातें गुप्त रखता, मानो कोई गुप्त रहस्य हो। कोई भी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताता।
When I asked what the Lord was doing on these trips, everyone kept it a secret from me, as if it were a secret. No one would say anything clearly.
तात्पर्य
उनकी गंभीर पूछताछ के बावजूद, किसी ने गोपा-कुमार को नहीं बताया कि भगवान नारायण कहां गए थे या क्यों। जो कोई जानता था, वह उस विषय पर खुलकर चर्चा करने को तैयार नहीं था, क्योंकि सर्वोच्च भगवान के निजी लीलाओं से संबंधित समाचार को सार्वजनिक करने से वैकुण्ठ में श्रद्धावान आत्मा का विघटन हो सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥