निजेष्ट-दैवत-श्रीमद्-
गोपाल-चरणाब्जयोः
तादृग्-रूप-विनोदादेर्
अनालोकाच् च दीन-वत्
अनुवाद
मुझे कुछ निराशा हुई कि मैं अपने पूज्य भगवान श्री गोपाल के चरणकमलों के अद्वितीय रूप, लीलाओं तथा अन्य विशेषताओं का दर्शन नहीं कर सका।
I felt a little disappointed that I could not see the unique form, pastimes and other specialities of the lotus feet of my revered Lord Shri Gopal.
तात्पर्य
वैकुंठ में गोपकुमार श्री गोपाल के क्रीडा-विहार, उनकी अनन्य परिषद और साज-सामान, उनके विशेष अनुग्रह या भक्तों के साथ उनके विशेष आमोद-प्रमोद नहीं देख सके। किंतु -वत् प्रत्यय से स्पष्ट है कि गोप-कुमार की निराशा केवल दिखावा मात्र थी। वैकुंठ में कभी भी कोई वास्तविक निराशा नहीं होती।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥