श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  2.4.109 
निजेष्ट-दैवत-श्रीमद्-
गोपाल-चरणाब्जयोः
तादृग्-रूप-विनोदादेर्
अनालोकाच् च दीन-वत्
 
 
अनुवाद
मुझे कुछ निराशा हुई कि मैं अपने पूज्य भगवान श्री गोपाल के चरणकमलों के अद्वितीय रूप, लीलाओं तथा अन्य विशेषताओं का दर्शन नहीं कर सका।
 
I felt a little disappointed that I could not see the unique form, pastimes and other specialities of the lotus feet of my revered Lord Shri Gopal.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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