श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  2.3.98 
यद्य् अस्य मत्-पितुः सम्यक्
करुणा स्यान् तदा त्वया
श्रोष्यते महिमा तस्य
गत्वा चानुभविष्यते
 
 
अनुवाद
यदि तुम्हें मेरे पिता की पूर्ण कृपा प्राप्त हो, तो तुम वैकुण्ठ की महिमा सुनोगे और स्वयं उसे देखने के लिए वहाँ जाओगे।
 
If you receive the full blessings of my father, you will hear the glories of Vaikuntha and go there to see it yourself.
तात्पर्य
वैकुण्ठ के और अधिक गुणों को प्रस्तुत करने के बजाय, गणेश यहां गोप-कुमार को उन्हें स्वयं देखने के लिए कहते हैं। चूंकि गोप-कुमार को भगवान शिव के व्यक्तिगत दर्शन का वरदान पहले ही मिल चुका है, इसलिए भगवान शिव की पूर्ण दया प्राप्त करना उनके लिए कठिन नहीं होना चाहिए। भगवान शिव की पूर्ण दया प्राप्त करने का परिणाम शिवलोक नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की शुद्ध भक्ति में सेवा करने के लिए वैकुण्ठ पहुँचना है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)