श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  2.3.79 
अनिर्वाच्य-तमांश् चेतो-
हारि-सर्व-परिच्छदान्
सङ्गतान् पूर्व-दृष्टैस् तैश्
चतुर्भिः सनकादिभिः
 
 
अनुवाद
उनके सारे आभूषण और साज-सज्जा अवर्णनीय थी। और उन लोगों के साथ वे चार भाई भी थे जिन्हें मैंने पहले देखा था, जिनका नेतृत्व सनक कर रहा था।
 
All their ornaments and decorations were indescribable. And with them were the four brothers I had seen earlier, led by Sanak.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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