श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.3.72 
तथापि दीर्घ-वाञ्छा ते
’नुग्रहाद् अस्य सेत्स्यति
अचिराद् इति मन्यस्व
स्व-प्रसाद-विशेषतः
 
 
अनुवाद
"फिर भी, भगवान शिव की कृपा से आपकी चिरकालिक अभिलाषा शीघ्र ही पूर्ण होगी। उनकी आप पर विशेष कृपा है, निश्चिंत रहें, ऐसा ही होगा।"
 
"Nevertheless, by the grace of Lord Shiva, your long-cherished wish will soon be fulfilled. He has special blessings on you, rest assured, it will happen."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)