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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)
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श्लोक 70
श्लोक
2.3.70
अबोधयं मनो ’नेन
महेशेनैव सा खलु
लीला-विशेष-वैचित्री
कृता मूर्ति-विशेषतः
अनुवाद
मैंने अपने मन से कहा कि यह भगवान शिव ही हैं जो भगवान गोपाल के विशेष रूप में ये अद्भुत विविध लीलाएँ करते हैं।
I said to myself that it is Lord Shiva who performs these wonderful and varied pastimes in the special form of Lord Gopal.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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