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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)
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श्लोक 48
श्लोक
2.3.48
व्रज-भूमाव् इहागत्य
साधये ’हं स्व-वाञ्छितम्
विमृशन्न् एवम् अश्रौषं
गीत-वाद्याद्भुत-ध्वनिम्
अनुवाद
मैं सोच रहा था कि अगर मैं इस व्रजभूमि पर लौट आऊँ तो अपनी सारी इच्छाएँ पूरी कर लूँगा। तभी मैंने कुछ अद्भुत गायन और संगीत सुना।
I was thinking that if I returned to this land of Vraja, I would have all my desires fulfilled. Then I heard some wonderful singing and music.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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