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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)
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श्लोक 33
श्लोक
2.3.33
भक्त्या परमया यत्नाद्
अग्रे दृष्टी प्रसारयन्
सूर्य-कोटि-प्रतीकाशम्
अपश्यं परमेश्वरम्
अनुवाद
मैंने पूरी श्रद्धा से आगे देखने की कोशिश की। और तभी मुझे करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी परम प्रभु के दर्शन हुए।
I tried to look ahead with complete devotion. And then I saw the Supreme Lord, radiant like millions of suns.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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