श्रृण्वन सु-भद्राणि रथांगा-पाणेर
जन्मनी कर्माणि च यानि लोके
गीतानि नामनि तद-अर्थकानि
गायं विलज्जो विचरेद असंगः
"एक बुद्धिमान व्यक्ति जिसने अपने मन को नियंत्रित किया है और भय पर विजय प्राप्त की है, उसे पत्नी, परिवार और राष्ट्र जैसी भौतिक वस्तुओं के प्रति सभी मोह त्याग देना चाहिए और बिना शर्मिंदगी के स्वतंत्र रूप से घूमना चाहिए, रथ के पहिए के वाहक भगवान के पवित्र नामों को सुनना और उनका जाप करना चाहिए। कृष्ण के पवित्र नाम सर्व-कल्याणकारी हैं क्योंकि वे उनके अलौकिक जन्म और कार्यों का वर्णन करते हैं, जो वे इस दुनिया में बंधी हुई आत्माओं के उद्धार के लिए करते हैं। इस प्रकार भगवान के पवित्र नाम पूरे विश्व में गाए जाते हैं।
एवं-व्रतः स्व-प्रिया-नाम-कीर्त्या
जातानुरैगो द्रुत-चित्त उच्चैः
हसत्यथो रोदिति रौति गायत्य
उन्मद-वन नृत्यति लोक-बाह्यः
"सर्वोच्च भगवान के पवित्र नाम का जाप करने से, व्यक्ति भगवद-प्रेम के चरण में आता है। फिर, भगवान के शाश्वत सेवक के रूप में अपनी प्रतिज्ञा में दृढ़ होकर, वह धीरे-धीरे भगवान के एक विशेष नाम और रूप से बहुत अधिक जुड़ जाता है। जैसे-जैसे किसी का हृदय आनंदपूर्ण प्रेम से पिघलता है, वह बहुत जोर से हंसता है या रोता है या चिल्लाता है। कभी-कभी वह पागल की तरह गाता और नाचता है, क्योंकि वह लोकमत की परवाह नहीं करता।"
