महद्भिर् भक्ति-निष्ठैश् च
न स्वाधीनेति मन्यते
महा-प्रसाद-रूपेयं
प्रभोर् इत्य् अनुभूयते
अनुवाद
किन्तु भक्तिमय सेवा में दृढ़ निश्चयी महान भक्तगण अपनी सेवाओं को अपने अधीन नहीं समझते, अपितु भगवान की परम कृपा की अभिव्यक्ति समझते हैं।
But great devotees, determined in devotional service, do not consider their service to be beneath them, but rather an expression of the Supreme Grace of the Lord.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥