श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  2.3.121 
श्री-भगवत्-पार्षदा ऊचुः
अस्मद्-ईश्वर-सन्-मन्त्रो-
पासकोमा-पति-प्रिय
गोप-नन्दन भक्तेषु
भवन्तं गणयेम हि
 
 
अनुवाद
भगवान के पार्षदों ने कहा: हे भगवान के दिव्य मंत्र के उपासक, हे उमा के पति के प्रिय, हे ग्वालपुत्र, हम आपको भगवान के भक्तों में गिनते हैं।
 
The Lord's associates said: O worshipper of the Lord's transcendental mantra, O beloved of Uma's husband, O son of cowherds, we count you among the Lord's devotees.
तात्पर्य
इन मधुर वचनों के साथ वैकुंठ-दूतों ने गोप-कुमार को आश्वासन दिया कि वह भी वैकुंठ में प्रवेश करने के योग्य है। सामान्यतः, जो लोग प्रामाणिक विष्णु-मंत्रों की यथोचित पूजा करते हैं, वे शुद्ध वैष्णव बन जाते हैं, और शुद्ध वैष्णव वैकुंठ में निवास कर सकते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)