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श्लोक 2.3.118  |
तथापि यद् इदं किञ्चिद्
भाषितं भवताधुना
स्वभावो भगवत्-प्रेष्ठ-
तमतौपयिको ह्य् अयम् |
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| अनुवाद |
| फिर भी आपने जो कुछ कहा है वह भगवान के एक परम भक्त की मनोदशा से पूर्णतया मेल खाता है। |
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| Yet what you have said completely matches the mood of a great devotee of God. |
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