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श्लोक 2.3.106  |
श्रीमद्-भगवतस् तस्य
मयि यावान् अनुग्रहः
तस्माच् छत-गुणोत्ताने
जाते वैकुण्ठम् एति तम् |
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| अनुवाद |
| और यदि कोई भगवान् से मुझसे भी अधिक कृपा प्राप्त कर ले - सौ गुना अधिक - तो वह वैकुण्ठ जा सकता है। |
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| And if someone receives more grace from God than me – a hundred times more – then he can go to Vaikuntha. |
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