श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 3: भजन (प्रेममय सेवा)  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.3.101 
महा-दयालुनानेन
पर-दुःखासहिष्णुना
वैष्णवैक-प्रियेणाहम्
उत्थाप्याश्वास्य भाषितः
 
 
अनुवाद
महात्माओं में परम दयालु, वैष्णवों के परम मित्र, भगवान शिव, जो दूसरों का दुःख सहन नहीं कर सकते, उन्होंने मुझे उठाया और मुझे सांत्वना देने के लिए बोले।
 
The most compassionate among the great souls, the best friend of the Vaishnavas, Lord Shiva, who cannot bear the suffering of others, picked me up and spoke to console me.
तात्पर्य
भगवान् शिव महादेव गोपाकुमार को अपनी पूर्ण कृपा देने को तैयार थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)