श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.1.82 
किं निद्राभिभवो ’यं मे
किं भूताभिभवो ’थ वा
अहो मद्-दुःस्वभावो यच्
छोक-स्थाने ’पि हृत्-सुखम्
 
 
अनुवाद
"क्या मैं सो गया हूँ? या मुझ पर किसी भूत का साया पड़ गया है? ओह, मैं इतना दुष्ट हूँ कि जब मेरे पास दुखी होने का कोई कारण भी होता है, तब भी मैं अपने दिल में खुशी महसूस करता हूँ!"
 
"Have I fallen asleep? Or am I possessed by some ghost? Oh, I am so wicked that even when I have reason to be sad, I still feel joy in my heart!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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