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श्लोक 2.1.75  |
नापि कोदण्ड-पाणिः स्याद्
राघवो राज-लक्षणः
केषाञ्चिद् एषां पूज्येन
गोपालेनास्तु वा सदृक् |
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| अनुवाद |
| "न ही वे राजा के चिन्ह और हाथ में धनुष लिए हुए रघुनाथ के समान हैं। किन्तु हो सकता है कि मेरा विग्रह इन भक्तों द्वारा पूजित गोपाल के समान हो।" |
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| "Nor is he like Raghunatha with the insignia of a king and a bow in his hand. But it may be that my form resembles that of Gopala worshipped by these devotees." |
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