श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  2.1.74 
नायं नरार्ध-सिंहार्ध-
रूप-धारी च मत्-प्रभुः
न वामनो ’प्य् असौ मीन-
कूर्म-कोलादि-रूपवान्
 
 
अनुवाद
"मेरे भगवान आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में प्रकट नहीं होते। वे बौने नहीं बनते, न ही मछली, कछुए, सूअर आदि का रूप धारण करते हैं।
 
“My Lord does not appear as half man and half lion. He does not become a dwarf, nor does he take the form of a fish, a tortoise, a pig, etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)