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श्लोक 2.1.70  |
तत्र किञ्चित् पुराणं स
शृणोति सह वैष्णवैः
तैर् अर्च्यमाना विविधा
विष्णु-मूर्तीश् च पश्यति |
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| अनुवाद |
| वहाँ दशश्र्वमेधघाट में उन्होंने वैष्णवों के साथ पुराणों के कुछ अंश सुने और उन्होंने भगवान विष्णु के विभिन्न विग्रहों के दर्शन किये जिनकी वे पूजा करते थे। |
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| There at Dashaswamedh Ghat he listened to passages from the Puranas with the Vaishnavas and saw the various idols of Lord Vishnu which they worshipped. |
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