| श्री बृहत् भागवतामृत » खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य » अध्याय 1: वैराग्य (त्याग) » श्लोक 60 |
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| | | | श्लोक 2.1.60  | तच् छ्रुत्वोपहसन्ति स्म
केचित् तं केचिद् अब्रुवन्
रे मूढ तूष्णीं तिष्ठेति
के ’प्य् ऊचुर् दीन-वत्सलाः | | | | | | अनुवाद | | कुछ वैष्णव यह सुनकर हँस पड़े। कुछ ने उससे कहा, "अरे मूर्ख, चुप हो जा!" कुछ और, जो पतित आत्माओं पर दया करते थे, उससे कुछ और ही कहने लगे। | | | | Some Vaishnavas laughed at this. Some said, "You fool, shut up!" Others, who had compassion for fallen souls, said something else. | | ✨ ai-generated | | |
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