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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)
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श्लोक 53
श्लोक
2.1.53
मा मूर्ख कुरु सन्न्यासं
द्रुतं श्री-मथुरां व्रज
तत्र वृन्दावने ’वश्यं
पूर्णार्थस् त्वं भविष्यसि
अनुवाद
[भगवान शिव ने कहा:] मूर्ख, संन्यास मत लो! तुरंत श्रीमथुरा जाओ। वहाँ वृंदावन में तुम्हारी सभी इच्छाएँ अवश्य पूरी होंगी।”
[Lord Shiva said:] Fool, don't take sanyasa! Go to Srimathura immediately. There in Vrindavan, all your desires will surely be fulfilled."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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