vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री बृहत् भागवतामृत
»
खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
»
अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)
»
श्लोक 216
श्लोक
2.1.216
भो गोप-नन्दन क्षेत्रम्
इदं मम यथा प्रियम्
तथा श्री-मथुरा ’थासौ
जन्म-भूमिर् विशेषतः
अनुवाद
हे ग्वालपुत्र! यह पवित्र नगरी मुझे जितनी प्रिय है, उससे भी अधिक प्रिय मेरी जन्मभूमि श्रीमथुरा है।
O son of the cowherd, as dear to me as this holy city is, even dearer to me is my birthplace, Sri Mathura.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas