निजैः प्रिय-तमैर् नित्य-
सेवकैः सह स प्रभुः
नर्म-गोष्ठीः वितनुते
प्रेम-क्रीडां च कर्हिचित्
अनुवाद
अपने प्रियतम स्थायी सेवकों के साथ, प्रभु गोपनीय बातचीत का आनंद लेते थे और कभी-कभी अंतरंग प्रेमपूर्ण लीलाएँ भी करते थे।
With His dearest permanent servants, the Lord enjoyed confidential conversations and sometimes even engaged in intimate loving pastimes.
तात्पर्य
अब गोपा कुमार के जीवन में एक और परिवर्तन लाने की इच्छा रखते हुए, भगवान जगन्नाथ ने उनके हृदय में असंतोष का बीज बोने का प्रबंध किया। ग्रंथ 202 से 205 में इस प्रकार वर्णन किया गया है कि कैसे गोपा कुमार जगन्नाथ के वंशानुगत उड़िया सेवकों से ईर्ष्या करने लगे थे, जिन पर प्रभु ने विशेष विशेषाधिकार प्रदान किए थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥