जब भी ब्रजभूमि को देखने की मेरी उत्सुकता तीव्र हो जाती, तब श्री जगन्नाथ की महिमा के बल पर उनके धाम के अनेक उद्यान मुझे वृन्दावन के समान, उसका समुद्र यमुना के समान तथा नीलाद्रि पर्वत की ढलान गोवर्धन के समान प्रतीत होने लगती।
Whenever my curiosity to see Braj Bhoomi intensified, then due to the glory of Shri Jagannath, many gardens of his abode would appear to me like Vrindavan, its sea like Yamuna and the slope of Niladri mountain like Govardhan.
तात्पर्य
अपने मंत्र के ध्यान का गंभीर अभ्यास शुरू करने पर गोपा-कुमार का सबसे पहला फल यह निकला कि उन्हें भगवान जगन्नाथ की कुछ विशेष संपन्नताएँ दिखाई देने लगीं। वह विशेष रूप से इस बात के प्रति सचेत हुए कि भगवान जगन्नाथ का निवास पुरुषोत्तम-क्षेत्र कई मायनों में कृष्ण के निवास, वृज-भूमि से अलग नहीं है। भगवान जगन्नाथ के विविध मंदिर गोपा-कुमार को वृंदावन के वन की याद दिलाते थे, नमक के समुद्र के किनारे उनकी याद यमुना नदी में आ जाती थी, और भगवान जगन्नाथ के मंदिर के पश्चिमी हिस्से के पास नीलाद्रि पहाड़ी का कुछ भाग उन्हें गोवर्धन की याद दिलाता था। इसलिए वह उतने दुखी नहीं होते, जितने तब होते जब वह कृष्ण के निवास को न देख पाते।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥