| श्री बृहत् भागवतामृत » खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य » अध्याय 1: वैराग्य (त्याग) » श्लोक 191 |
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| | | | श्लोक 2.1.191  | त्वम् एतस्य प्रभावेण
चिर-जीवी भवान्व्-अहम्
ईदृग्-गोपार्भ-रूपश् च
तत्-फलाप्त्य्-अर्ह-मानसः | | | | | | अनुवाद | | “इस मंत्र की शक्ति से आप दीर्घायु हों, आपको सदैव ग्वालबाल का रूप प्राप्त हो, तथा आपमें मंत्र का फल प्राप्त करने के लिए सही मानसिकता विकसित हो। | | | | “May the power of this mantra grant you a long life, may you always have the form of a cowherd boy, and may you develop the right mindset to attain the fruit of the mantra. | | ✨ ai-generated | | |
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