श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 166
 
 
श्लोक  2.1.166 
अन्तः-पुरं प्रविष्टो ’हं
तेषां करुणया सताम्
 
 
अनुवाद
मैं शीघ्र ही भगवान के उस पवित्र क्षेत्र में पहुँच गया। वहाँ के सभी निवासियों को प्रणाम करते हुए, उन पुण्यात्माओं की कृपा से मैं मंदिर परिसर में प्रवेश कर सका।
 
I soon reached the Lord's sacred area. I bowed to all the inhabitants there, and by the grace of those pious souls, I was able to enter the temple complex.
तात्पर्य
चूंकि गोपा-कुमार एक विदेशी थे और कोई नहीं जानता था कि उनका व्यवसाय क्या था, मंदिर के मैदान पर उनकी अचानक उपस्थिति से संदेह पैदा हो सकता था। हालाँकि, पुरुषोत्तम-क्षेत्र के शुद्ध वैष्णवों ने उनका दयालुतापूर्वक स्वागत किया; उन्होंने पहचाना कि वह प्रभु जगन्नाथ की दया प्राप्त करने आए हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)