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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)
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श्लोक 158
श्लोक
2.1.158
एतस्मिन् एव समये
तत्र दक्षिण-देशतः
समागतैः साधु-वरैः
कथितं तैर्थिकैर् इदम्
अनुवाद
तभी दक्षिण से कुछ पूज्य संत तीर्थयात्रा पर आये और मुझसे कहा:
Then some revered saints from the south came on pilgrimage and said to me:
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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