|
| |
| |
श्लोक 2.1.135  |
प्रकृत्यैव न जानामि
माथुर-ब्राह्मणोत्तम
अस्माद् विलक्षणः कश्चित्
क्वाप्य् अस्ति जगद्-ईश्वरः |
| |
| |
| अनुवाद |
| हे मथुरा के श्रेष्ठ ब्राह्मण, अपनी भौतिक परिस्थितियों के कारण मैं यह नहीं जानता था कि ब्रह्माण्ड का स्वामी इस संसार के प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक वस्तु से भिन्न है। |
| |
| O best brahmana of Mathura, due to my material circumstances I did not know that the Lord of the universe is different from every person and every object in this world. |
| ✨ ai-generated |
| |
|