श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  2.1.134 
हा हा धृतः करण्डान्तर्
अस्थाने परमेश्वरः
किम् अप्य् असौ न चाभुङ्क्त
निद्रा तु क्षुधया कथम्
 
 
अनुवाद
"हे भगवान, आप तो परमपिता परमेश्वर को एक डिब्बे में बंद कर रहे हैं—कितनी अनुपयुक्त जगह! और उन्होंने तो खाना भी नहीं खाया! भूखे होंगे तो सोएँगे कैसे?"
 
"Oh my God, you're locking Almighty God in a box—what an inappropriate place! And He hasn't even eaten! How can He sleep if He's hungry?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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