तन्-महा-पुरुषस्यैव
प्रभावात् तादृशेन च
जपेन चित्त-शुद्धिर् मे
तत्र श्रद्धाप्य् अजायत
अनुवाद
उस महापुरुष के प्रभाव से ऐसे निरुद्देश्य जप से भी मेरा मन शुद्ध हो गया और मुझे मंत्र पर विश्वास हो गया।
Due to the influence of that great man, even such aimless chanting purified my mind and I started believing in the mantra.
तात्पर्य
अपने अभ्यास और महत्व के वैज्ञानिक ज्ञान के बिना, युवा साधक गोप-कुमार को मंत्र में ठोस विश्वास नहीं हो सकता था। वह इसकी प्रभावकारिता के बारे में दृढ़ता से आश्वस्त नहीं था, न ही वह स्नेह से इसकी ओर आकर्षित था। फिर भी, उनके भोलेपन ने उनके मन को वासना, ईर्ष्या और लालच से शुद्ध किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥