जब गोपा-कुमार को अपना मंत्र मिला होगा, उन्हें नहीं सोचना चाहिए होगा कि यह उनके गुरु द्वारा छाछ और दही के उपहार के प्रतिदान का तरीका है। उनके गुरु, जो पूर्ण रूप से आत्मसंतुष्ट थे, को उनकी सेवा की आवश्यकता नहीं थी। केवल गिरी हुई आत्माओं के लिए अनन्त करुणा के कारण ही गुरु ने गोपा-कुमार पर अपनी दया दिखाई।
