ऋषि देवल ने एक ऋषि के लक्षणों को परिभाषित किया है:
ऊर्ध्व-रेताः तपस्य उग्रो
नियताशी च संयमी
शापानुग्रहयोः शक्तः
सत्य-संधो भवेद ऋषिः
"एक ऋषि वो व्यक्ति होता है जिसका वीर्य ऊपर की ओर बहता है, जो कठोर तपस्वी होता है, जो संयमित रूप से आहार ग्रहण करता है, अपनी इंद्रियों को नियंत्रण में रखता है, शाप और अनुग्रह देने में समर्थ होता है, और सत्य पर दृढ़ता से अडिग रहता है।"
