श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 1: वैराग्य (त्याग)  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  2.1.107 
इति बोधयितुं चास्य
सर्व-संशय-नोदनम्
स्व-वृत्तम् एव निखिलं
नूनं प्राक् प्रतिपादये
 
 
अनुवाद
उसे इस बात का एहसास दिलाने के लिए, पहले मुझे उसे अपना पूरा इतिहास बताना होगा। इससे उसके सारे संदेह दूर हो जाएँगे।
 
To convince him of this, I must first tell him my entire history. This will clear up any doubts he might have.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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