श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  1.7.92 
कृते सर्व-परित्यागे
तैर् भद्रं यदि मन्यते
शपे ते ’स्मिन् क्षणे सत्यं
तथैव क्रियते मया
 
 
अनुवाद
यदि व्रजवासियों को यह अच्छा लगता है कि मैं सब कुछ त्याग दूं, तो मैं आपसे वादा करता हूं कि मैं एक क्षण में ही ऐसा कर दूंगा।
 
If the people of Vraja wish that I renounce everything, I promise you that I will do so in a moment.
तात्पर्य
यदि हम इन शब्दों को गंभीरता से लें तो, यदि इससे व्रज-वासियों को ख़ुशी मिलेगी तो कृष्ण को अपनी पत्नियों, अपने बच्चों और द्वारका के लिए किसी और को छोड़ने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि एक पवित्र प्रतिज्ञा आमतौर पर केवल एक ऐसे व्यक्ति के सामने ही की जाती है जिसपर किसी का अटल भरोसा होता हो और इसका अर्थ यह है कि सत्यभामा भी कृष्ण को बहुत प्रिय है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)