तथा व्रज-जनेष्व् अस्मन्-
निर्भर-प्रणयाद् अपि
अवरे किं न जानासि
मां तद्-इच्छानुसारिणम्
अनुवाद
भगवान बोले: हे दुर्बल बुद्धि सत्राजिती, जिस प्रकार तुम रुक्मिणी को पारिजात पुष्प जैसे विशेष वरदान मिलने पर क्रोधित हुई थीं, उसी प्रकार अब तुम व्रजवासियों के प्रति हमारे अगाध प्रेम पर क्रोधित हो रही हो। हे मूर्ख स्त्री, क्या तुम नहीं जानती कि मैं उनकी इच्छाओं के अधीन हूँ?
The Lord said: O weak-minded Satrajitī, just as you were angry when Rukmini received the special boon of the Parijaata flower, so now you are angry at our immense love for the people of Vraja. O foolish woman, do you not know that I am subject to their desires?
तात्पर्य
सत्यभामा से अप्रसन्न होकर कृष्ण को स्मरण हुआ कि उसके पिता ने कभी-कभी मूर्खतापूर्ण व्यवहार किया था; इस प्रकार उसको वह "सत्राजित की पुत्री" के रूप में संबोधित करते हुए कमजोर दिमाग वाली और मूर्ख कहता है। वह स्वयं का उल्लेख बहुवचन में करता है या तो इसलिए कि वह श्री बलराम और रोहिणी, जो वृज-वासियों के लिए उसकी भावनाओं को साझा करते हैं, के बारे में सोच रहा है, या इसलिए कि उसे वृज-वासियों के प्रेम के महान खजाने को रखने के लिए अपने ऊपर गर्व है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥