अतः कृष्ण और उनके भाई को उनकी वर्तमान अवस्था में ही सावधानी से ले जाओ और उन्हें धीरे से वहाँ ले जाओ। परन्तु केवल रोहिणी ही उनके साथ जाए—और कोई नहीं।
So take Krishna and his brother carefully and gently there in their present state. But only Rohini should accompany them—no one else.
तात्पर्य
ब्रह्मा जी चाहते हैं कि गरुड़ कृष्ण और बलराम जी को सावधानी पूर्वक नव-वृंदावन पहुचाएँ। दोनों भाइयों को पता नहीं चलना चाहिए कि वे अभी भी द्वारका-धाम में हैं, और उनके भक्तों को भ्रम को बिगाड़ने से रोकना चाहिए कि वे उनका अनुसरण करें। रोहिणी साथ आ सकती हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि कैसे समझदारी से काम करना है, और विशेष रूप से क्योंकि वह पहले व्रज-भूमि में रहती थीं और इसलिए वे यहाँ जंचेंगी। प्रतिकृति वृंदावन का निर्माण विश्वकर्मा ने किया था, जो देवताओं के वास्तुकार थे। लेकिन व्रज-वासियों की नकल करना उनके कौशल से परे था। वह नंदा, यशोदा, और अन्य वरिष्ठ ग्वालों, श्री राधिकाजी और अन्य युवा गोपियों, या श्रीदामा और कृष्ण के अन्य गोप मित्रों जैसे अद्वितीय भक्तों की प्रतियाँ नहीं बना सकते थे। लेकिन वह व्रज-वासियों के स्थिर चित्रों को इतना जीवंत बनाने में सक्षम था कि वह कृष्ण को भी बेवकूफ बना सकता था। बनाए गए समग्र प्रभाव में, नव-वृंदावन व्यावहारिक रूप से असली से अप्रभेद्य था, यहाँ तक कि पौधे और जानवरों के जीवन के छोटे विवरणों तक।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥