सरिद्-वन-गिरि-द्रोणीः
वीक्षण कुसुमितान् द्रुमान्
कृष्णं संस्मारयन् रेमे
हरि-दासो व्रजोकासाम
''व्रज की नदियों, जंगलों, पहाड़ियों, घाटियों और फूलों से भरे पेड़ों को देखकर, हरिदास उद्धव ने वहां के निवासियों को प्रेरित करते हुए उनके सामने भगवान कृष्ण का स्मरण कराया।'' (भागवतम 10.47.56)
