माता च देवकी पुत्रम्
आशीर्भिर् अभिनन्द्य तम्
भोग-सम्पादनायास्य
कालाभिज्ञा द्रुतं गता
अनुवाद
माता देवकी ने अपने पुत्र को आशीर्वाद दिया। समय का पूरा ज्ञान होने के कारण, वे शीघ्रता से उसके लिए भोजन तैयार करने चली गईं।
Mother Devaki blessed her son. Knowing the time, she quickly went to prepare food for him.
तात्पर्य
देवकी का कृष्ण की रानियों के समूह से स्वयं को क्षमा करना, कृष्ण को उनके साथ स्पष्ट रूप से उस मामले पर चर्चा करने की स्वतंत्रता देता है जो इस अध्याय का अनिवार्य संदेश है - वृज की युवा गोपियों की सर्वोच्च भक्ति। कृष्ण को अपनी माँ के प्रति बहुत अधिक श्रद्धा थी कि उनकी उपस्थिति में इस बारे में खुले तौर पर बात करें। वह जानती थी कि कृष्ण के लिए खाना पकाने का समय था, और एक गहरे स्तर पर वह यह भी समझती थी कि अब उसे अपनी छुट्टी लेनी चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥