श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.7.68 
तदानीम् एव सम्प्राप्तं
भगवद्-भाव-कोविदम्
आरुह्यालक्षितस् तार्क्ष्यं
निज-प्रासादम् आगतः
 
 
अनुवाद
उसी समय गरुड़ वहाँ पहुँचे, क्योंकि वे भगवान के भावों को भली-भाँति समझते थे। कृष्ण उन पर सवार होकर अदृश्य होकर अपने महल में लौट गए।
 
At that very moment, Garuda arrived, knowing the Lord's intentions well. Riding on him, Krishna disappeared and returned to his palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)