श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.7.41 
श्री-नन्द-नन्दन उवाच
प्राणेश्वरि रहः-प्राप्तं
भक्तम् एकाकिनं च माम्
सम्भाषसे कथं नाद्य
तत् किं वृत्तासि मानिनी
 
 
अनुवाद
श्री नन्दनन्दन ने कहा: हे मेरी आत्मा की स्वामिनी, आप मुझ भक्त से, जिससे आप गुप्त स्थान में मिली हैं, बात क्यों नहीं करतीं? हे मेरी अभिमानी, आप किस काम में इतनी व्यस्त हैं?
 
Sri Nandanandana said: O mistress of my soul, why do you not speak to me, the devotee whom you have met in the secret place? O my proud one, what are you so busy with?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)