श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.7.23 
श्रीदामाद्या वयस्याश् च
स्थिता भवद्-अपेक्षया
स्नेहेन पितरौ किञ्चिन्
न शक्तौ भाषितुं त्वयि
 
 
अनुवाद
श्रीदामा और आपके अन्य मित्र यहाँ आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। और आपके माता-पिता इतने प्रेम से भरे हुए हैं कि वे आपसे बात भी नहीं कर पा रहे हैं।
 
Sridama and your other friends are waiting for you here. And your parents are so filled with love that they cannot even speak to you.
तात्पर्य
कृष्ण के मित्र गायों के उत्तरदायी हैं, इसलिए जब अधीर गायें आगे बढ़ने लगीं तो बालकों को उनका अनुसरण करना चाहिए था। किन्तु बलराम संकेत करते हैं कि वे बालक कृष्ण के बिना उन्हें छोड़कर जाने के लिए बहुत अधिक आसक्त थे। कृष्ण की माता और पिता को चाहिए था कि वे कृष्ण को बिस्तर से उठकर गायों के पीछे जाने के लिए बुलाएँ, किन्तु बलराम के अनुसार नन्द और यशोदा भी आनंद में खोए हुए थे। वास्तव में, हालाँकि नन्द, यशोदा, गोपालक बालक, और अन्य नव-वृन्दावन-वासी अचेतन गुड़िया थे, अचल और असमर्थ थे कृष्ण के किसी भी प्रयास का जवाब देने के लिए कुछ कहने या करने के लिए जो उनके साथ संवाद करने के लिए कर रहे होंगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)