श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 7: पूर्ण (उत्कृष्ट भक्तों का शिखर)  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  1.7.131 
इत्य् एवम् उपकारो ’द्य
भवताकारि मे महान्
तत् ते ’स्मि परम-प्रीतो
निजाभीष्टान् वरान् वृणु
 
 
अनुवाद
अतः आज तुमने मुझ पर बहुत कृपा की है, इसलिए मैं तुमसे प्रसन्न हूँ। कृपया जो भी आशीर्वाद चाहो, चुन लो।
 
So today you have been very kind to me, so I am pleased with you. Please choose whichever blessing you wish.
तात्पर्य
नारद ने भगवान कृष्ण को गोपियों के उनके प्रति दृढ़ निष्ठा की याद दिलाई, और इसके लिए भगवान कृष्ण आभारी हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)