उद्धव मुस्कुराये और बोले, "हे प्रभु, क्योंकि वह भयभीत और लज्जित है।" तब भगवान, जो सदैव ब्राह्मणों का पक्ष लेते हैं, स्वयं नारद को अन्दर ले आये और उनसे बोले।
Uddhava smiled and said, "O Lord, because he is afraid and ashamed." Then the Lord, who always favors the brahmanas, himself brought Narada in and spoke to him.
तात्पर्य
जब उद्धव ने नारद के अजीबोगरीब व्यवहार के बारे में सोचा, तो वह मुस्कुराए बिना नहीं रह सके - उनके उत्साही आगमन, उनके भावों की बेकाबू लहरें, और कृष्ण द्वारा नई वृंदावन की यात्रा देखने के लिए छिप जाना। उद्धव ने कृष्ण को बताया कि नारद इस अपराध के डर से भयभीत थे कि उन्होंने कृष्ण के मन को विचलित किया है, और जब कृष्ण ने उत्तर दिया कि नारद को किसी भी कारण से उनसे कभी नहीं डरना चाहिए, तो उद्धव ने कहा कि नारद शर्मिंदा भी हैं। शुद्ध भक्त आम तौर पर अपनी निजी खुशियों को प्रकट करने में शर्मिंदगी महसूस करते हैं, क्योंकि इससे दूसरों की परेशानी हो सकती है। इसलिए, नारद को शांत करने के लिए खुद कृष्ण ने उन्हें अंदर बुलाने के लिए गए। कृष्ण ने ऋषि से उचित सम्मान से संपर्क किया, उन्हें प्रणाम किया, उन्हें हाथ पकड़कर महल में ले गए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥